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हम नहीं तुम कहलाते बाज़ीगर
इतनी धुप कभी हुई नहीं थी जितनी आज हमने बागानों में देखी, हाँ ये बात और है की जिस दिन देखी उस दिन किसी ने घर में रोटी नहीं सेकी , क्यों के रोटी तो सेकाई जाती है खाने वालों के भूक मिटाने, पर हम तो आ …