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लुत्फ़ मदारी का
सज़ा तो हमें तब सुनाई दी थी जब हम अपनी इज़्ज़त बचा रहे थे, अब ये कैसी सज़ा थी जो इज़्ज़त बचाने वाले को मज़ा चखा रहे थे, अबे बकचोदी करना है तो ऐसे करो के सामने वाले भी बकचोद बनना चाहे ये क्या बात हुई के आप…