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ब्लेड है तकदीर नहीं।
ब्लेड है तकदीर नहीं जो हाथ से फिसल जाए, पकड़ो उस गुणवान धनी को जो तकदीर मसल आए, अरे तकदीर बनी थी पिस्तौल की छबि, फट से अंदर तक हो आए, अब इसमें क्या संकोच है इतनी, के गुणवान अंदर ना हो आए, अब अंदर क…