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उन दिनों की बात?
पिस्तौल है कोई फर्श नहीं है पैरों के नीचे आती नहीं, आती भी अगर पैरों के नीचे झाड़ू से पुछवाती नहीं, झाड़ू आखिर तो है किसिका दिल का नज़राना, इतना ना इतराओ के जाके भरना हो जुर्माना, पाप आखिर किए हो त…