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आगरा/1984-85 (भाग-3)
21 फरवरी 1985 को रजिस्टर्ड डाक से मुझे टर्मिनेशन लेटर मिल गया और रोजाना हाजिरी लगाने जाने से छुट्टी हो गई। इसी के साथ-साथ अभी तक जो तीन-चौथाई वेतन सस्पेंशन एलाउंस के रूप मे मिल रहा था वह भी मिलना ब…