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आगरा/१९८२-८३(भाग ३) / १९८४-८५ (भाग १)
आगरा लौटने पर भी शालिनी का मन अस्त-व्यस्त रहा उन्हें अपने दिवंगत पुत्र की याद सताती थी जो मात्र १२ घंटे ही जीवित रहा था.हमारी बउआ को बाँके बिहारी,मंदिर -वृन्दावन पर आस्था थी वहीं के दर्शन करके लौटत…