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योग का तत्कालीन क्रियात्मक बोध
– प्रोफ़ेसर बलराम सिंह योग: सत्तस्य पर्याय: तस्य सार्थकेव मानव जीवनस्य लक्ष्य:। योग सत्य का पर्याय है, उसी को सार्थक बनाना जीवन का उद्देश्य है। वैसे तो सत्य एक सरल सी धारणा है पर अधिकतर व्यक्…