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आसोज
जिसके इंतज़ार में रूह-अफ़ज़ा की तमाम बोतलें कुर्बां हुई, उन बारिशों की रुख़सती के आसार लगते हैं। वो साल में बस एक ही बार कुछ रोज़ के लिए आने वाली दूर गाँव की बुआ की तरह है, गुस्सा तो जैसे नाक पे ही धरा …