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मुक्तिबोध के बहाने रचना और आलोचना के अंतर्संबंधों की पड़ताल: प्रो.राजकुमार
लेखन एक विशिष्ट लीला कर्म हैं, रचनाकार के सम्पूर्ण व्यक्तिगत सामाजिक जीवन का लेखा-जोखा नहीं। लेखन और रचनाकार के जीवन में संगति की अपेक्षा एक आदर्श के रूप में ठीक है, लेकिन अक्सर ऐसी संगति होती नहीं…