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मुक्तिबोध के बहाने साहित्य-संस्कृति पर एक बहस: डॉ. राजकुमार
पश्चिमी विचारों के बढ़ते वर्चस्व के बावजूद उन्नीसवीं शताब्दी में ‘अन्धेर नगरी’ जैसे नाटकों, बीसवीं सदी में हबीब तनवीर के नाटकों, विजय तेन्दुलकर के ‘घासीराम कोतवाल’, गिरीश कर्नाड के ‘नागमण्डलम’ और ‘ह…