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एक शहर ये भी – कविता 6 – दिल्ली ६
आज युहीं पुरानी दिल्ली की उन जानी अनजानी तंग गलियों में लौट जाने का मन हुआ गलियां ऐसी की लखनऊ की भुलभुलैया फीकी पड़ जाये, चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन से उतर हम भी हो लिए लोगों के उमड़ते हुजूम के साथ, नय…