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एक शहर ये भी – कविता 4 – भूली बिसरी यादें
आज कुछ सायों से मुलाक़ात हुई पुरानी यादें थी साथ हो लीं दरयागंज में गोलचा सिनेमा के पास संडे बुक मार्किट में किताबों के पन्ने पलटते हुए पुराने दिन याद आ गए, भीड़भाड़, किताबों, सिक्को, कपड़ों की छोटी छो…