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वो पापा ही थे …
बारिश की उन रातों में डूबे हुए नम यादों में घूँट घूँट उन घंटों को पीते थे हाँ, वो पापा ही थे सुबह की न होश न खबर सूरज की किरणों से परहेज कर खाली बोतलों में अधूरे सपनों को समेटते थे हाँ, वो पापा ही …