themusingquill.com
ख्वाहिश बस इतनी सी थी…
रात की खामोशियों को चीरती हुई एक आवाज़ गूंजी जानी पहचानी सी उस शोर की तलाश में कदम मेरे कभी अंधेरों का पीछे करते कभी तेरी यादों का ~~~ सन्नाटों से लैस एक चौराहे पर फिर दूर खड़ी तेरी परछाई मुझे देख मु…