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शब्दों का हठ
शब्दों ने आज न जाने क्यूँ भुरभुरा सा एक रूप धरा है। सुबह से कमरे के कोने में उन्होंने सबको घेर रखा है । अंतहीन नभ में उड़ने का हठ ऐसा मन में पकड़ा है । आज कुछ अलग करने का दृढ़ निश्चय किया पक्का है ॥ क…