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कभी मुग्ध हो मेरी कविता पर..
कभी मुग्ध हो मेरी कविता पर, तुम अपने कहानी में जो मोड़ बनाओ, कभी मान मेरी बातों को, तुम अपने जीवन में जो नए अर्थ सजाओ, कभी खोकर मेरी आँखों में, तुम अपने ख़्वाबों में जो मुझे बसाओ, हो सरस-सुफल मेरा यह…