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ऐसा नहीं है कि मेरे तरकस में तीर नहीं है
ऐसा नहीं है कि मेरे तरकस में तीर नही है, यह गजल आज के हालात को बयां करती है जहाँ झूठ अपने पंख फैलाये हुआ है सच सिहरा हुआ है, जहां चपल वक्ताओं की भरमार हो गई है पर श्रोता बनने की परख, सहनशक्ति किसी …