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मैं माँ को सदा खुश रखूँ
मेरे कोई शब्द इतने मधुर नहीं, कि कोई कविता लिखूं जिसने मुझे रचा उसके भाव, मैं कैसे रचूं? वो मेरी उम्मीदों का आसमां है, उसके दुआओं की बरसात में मैं रोज भिंगु, उसकी सारी चाहतें, सारे ख्वाब मुझसे है, …