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बुद्धिपिशाच
धूप से ही सही, कुछ बाल पक जाने दो। हर महीने जो मिल लेता हूँ नाई से, ये गलत आदत बस छूट जाने दो। फिर तो आदमी मैं भी बुद्धिपिशाच दिखूंगा, बस एकाध नीलाम हुए तमग़ा मिल जाने दो। -सन्नी कुमार…