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हरकत काफिराना कर आया..
दुआओं में था फिर भी मैं एक खता कर आया, जिक्र फिर से महबूब का कर, खुदा को शायद खफा कर आया, मासूम था मैं फिर भी गुनाह-ए-अजीम कर आया, खफा हो खुदा तो दो पल को है मंजूर, पर ना खफा हो कभी मेरा महबूब, ऐसा…