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हर सुबह जिस आंगन में..
हर सुबह जिस आंगन में, हजारों ख्वाब खिलते है, चाहत की हर उड़ान को, जहाँ पर पंख मिलते है, है वही आँगन मेरा, जहाँ हम रोज संवरते है.. कौतूहलता की हर रात का जहाँ, अंत होता है, ज्ञान से प्रकाशित वह चौखट, …