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कैसे भूल सकता हूँ वो दिन
कैसे भूल सकता हूँ वो दिन, जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी. परेशां था मैं तब गुजरे कल से, जब मेरे आने वाले कल की बात चल रही थी.. अन्दर मुरझा गये थे तब सींचे सपने, जब बाहर उम्मीदों की बयार चल रही थी…