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मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश
यूं तो ख्वाहिशों का कोई अंत नहीं.. ये एक अथाह समन्दर है मन में, जो हमारी पहचान बुनती है, जो जीवन के कालचक्र में ईंधन का काम करती है.. किसी को चाह बचपन की, किसी को चाह तर्पण की, किसी को जन्नत लुभाता…