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ख्वाबों को बुनने दो
ख्वाबों को बुनने दो, ख्यालों को पलने दो, समेट लेंगे ये चादर में आसमां, जो इनको उड़ने की आजादी दो। कलियों को खिलने दो, बचपन को संवरने दो, बदलेंगे यही संसार को कल में, जो इनको आज से सपने दो! बेमतलब न …