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मैं शर्मिंदा हूँ
वह गरीब की बेटी थी और शर्म इस बात का है की जीते जी सुरक्षित न रख पाने वाला कानून उसके मरने के बाद भी उसको इंसाफ न दे पाया. अब बारी परिवार की है, समाज की है…आंसुओं से कुछ नहीं होगा, बुराई चरम …