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कैसी समानता?
मै “सामान्य” हूँ, पर मैं इनके नही सामान हूँ, बचपन में आजादी नहीं थी संग सबके खेलने की, दादाजी कहते थे तुम भूमिहार हो तुम्हारे समान नही सब जात, खेलना कूदना पढना सिर्फ ब्राह्मण भूमिहार …