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अब आनेवाले मौकों को पहचानों
दिनों बाद कल फिर कोई , ख्वाब आया था, पहली बार अपना-सा कोई, अजनबी आया था. स्पष्ट सबकुछ मुझे याद नहीं हैं, पर ओढ़े धूल का चादर, और आँखों में सवालों का सैलाव लिए, वो मुझसे मिलने आया था.. उसमें अपनापन …