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उस दर से मेरी सदा ही दुरी रखना
उस दर से मेरी सदा ही दुरी रखना, गुज़रकर जहाँ से लोगों के ईमान बदलते हो.. दब जाती हो चींख जहाँ सिक्कों की खनक में, भूल जाते हो जाके खुद के वजूद को, उस तेज से हमको महरूम ही रखना, देख जिसको एक बार और …