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ऐ हवा तू खुद में उसकी महक समेट ला..
ऐ हवा तू खुद में उसकी महक समेट ला, वो निकली जो होगी संवर के, तू उसकी आहट समेट ला.. कर तू मुझपे एहसान आज, मिलके उसके पास से आ, कि रूठी जिंदगी मुझसे है यार, कुछ साँसे उससे उधार ला.. ऐ हवा तू खुद मे…