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एक सिक्के की आस में..
एक सिक्के की आस में, कब से भटक रहा है वो, सिग्नल की बत्ती लाल देख, गाडियों पे है झपट रहा वो, मांग रहा हर एक से सिक्का, लगाये हुए वो आस.. कुछ उससे नज़रे चुरा रहे, कुछ अपनी मजबूरी जता रहे, आसानी से म…