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वो लड़की
बंद मुठी रेत की जो यु हाथों से झरने लगती है निराशा से वो लड़की आज यु मरने लगती है कशुर ना था उसका दबोचा किसी ने जो था पीछे से शर्मशार कर इनायत को खरोंचा जो सिने से वो तरप रही झल्ला रही खींचा जो कोने…