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ग़ज़ल: एक प्रयास
अंतर्राष्‍ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मैं भी कुछ साल पहले लिखी पंक्तियाँ ग़ज़ल के तौर पर पेश कर रहा हूँ। ये बहुत ही निम्न दर्जे के मिसरे हैं लेकिन फिर भी थोड़ा बेशर्म होकर इन्हें आपके सामने रख रहा हूँ। साह…