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Kabhi Na Chute Pind Dhukho Se Jisse Braham Ka Gyan Nahi
कभी न छूटे पिण्ड दुःखों से, जिसे ब्रह्म का ज्ञान नहींसंसारी व्यक्ति द्वेषी होता है । जितना राग होता है, उतना द्वेष होता है। भक्त रागी होता है। भगवान में राग करता है, आरती पूजा में राग करता है, मंदिर मूर्ति में राग करता है। जिज्ञासु में होती है जिज्ञासा। ज्ञानी में कुछ नहीं होता