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Gobar
जाने क्या अब समा गया सर में खुद को बेघर समझ लिया घर में आस’मान तक छुपा हुआ देखा क्या क्या नही दिखा पता नही उस पल भर में ना जाने किस किस ने हमे देखा उस छ्ण भर में जब हम देर तक खड़े रहे उस गोबर में ©A…