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मलाल / Malal
बींधा तीखी बातों से एक दूजे को हरदम अब देखो वो जख्म भीतर कैसे पलता है लाख बिसारना चाहो कांटे सा कसकता है टीस उठे हर वक़्त मरहम काम ना करता है नासूर बन न जाये कहीं हरदम खून सा रिसता है वक़्त पर …