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ज़िन्दगी के खोये पन्नो से
हां! देखा है मैंने गहराई के कुएं में रह रह कर वो चीख सुनाई देती है किसी रोज़ दिया मैंने जिसे आकर था भूल गए थे वो पुकार दिल में कहीं दफना बैठे थे सोचा था की आईना झुठ है हाँ! तोले हैं मैंने बराबर दर्द…