sahitya.acharyaprashant.org
आचार्य प्रशांत: पश्चाताप व्यर्थ है; पाप नहीं पापी को छोड़ो
अपने आप को बदलो, ग़लती को नहीं बदलो। इस दृष्टि को समझियेगा, गलती को बदलने की कोशिश मत करिए, ग़लती सुधारने की कोशिश मत करिये, स्वयं को सुधारिए क्योंकि आप ही वो हैं जो बार-बार गलती करता है। आप जगे हु…