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निन्दा कहाँ से? अहं या स्त्रोत?
निंदा, नफ़रत, आप तभी तक कर पाओगे, जब तक भेद दिखाई देते हों, जब तक द्वैत दिखाई देते हों। यही कबीर सन्देश दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि शैतान, शैतान नहीं है। प्रकट तो वो शैतान के ही रूप में हो रहा है। इस…