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बात क्या है !
बात ऐसी है नहीं , जैसा तुम समझती हो। छोटी छोटी बातों का बतंगड़ क्यों बनती हो ? हर एक बात को पकड़ कर उलझती हो , उलझाती हो। अब बस ! मैं समझ ही नहीं पाता हूँ , जाने तुम क्या चाहती हो ! हाँ। … सह…