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क्यों चुप है चाँद ?
क्यों आज चुप है चाँद ? ना जाने कितनी बातों का गवाह कितने रातों का राज़दार फ़लक से पल पल का हिसाब रखता, कभी मुँडेर पर , कभी किसी शाख़-ए-गुल को चूमता, गुलमोहर पर बिखरा कर अपनी चाँदनी अक्सर थका हुआ म…