rekhasahay.wordpress.com
ज़िन्दगी के रंग – 154
हम इंसान हर बात में भेदभाव, अंतर खोज लेते हैं, पर कैसा भी फूल क्यों ना हो, बिना अंतर किए मधुमक्खी उससे मीठा शहद बना ही लेती है.…