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ज़िंदगी के रंग – 153
कहां से आए हैं ? कहां जाना है? कुछ पता नहीं है . फिर भी देखो तामझाम कितना बिखराए हैं. अगर कुछ हाथ से छूट गया तो अपना समझ कर रो रहे हैं. जबकि अपना है क्या इसकी समझ है ही नहीं।…