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गुलज़ार दुनिया
दुनिया गुलज़ार थी . चारों ओर बहार हीं बहार थी , पता हीं नहीं चला कब पतझड़ आ गया , आसमान को तकते हैं इस इंतज़ार में ……. वसंत आ जाए , बहारे ले कर , मुस्कुराते फूलों को ले कर .…