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ज़िंदगी के रंग – 109
क्यों करती हो तुम ऐसा ज़िंदगी ? अब तुम्हारी यह लुका छिपी रास नहीं आती . कभी कभी लगता है हार चुके हैं ज़िंदगी से , तभी राहत की ठंडी बयार आती है किसी अनदेखे वातायन …..झरोखे से . कोई अनजानी वीथि…