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ज़िंदगी के रंग – 92
ज़िंदगी कुछ शब्दों में नहीं लिखी जा सकती यह शब्दों की लड़ाई या कोई ग़ज़ल, गीत , या कहानी नहीं. बहते झरने सा …. खट्टे-मीठे, रोते-हँसते कुछ नाराज़ राज कुछ ख़ुशगवार पलों का हिसाब-किताब हैं. It’s…