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ज़िंदगी के रंग -78
ज़िंदगी को देखने का नज़रिया सबका अलग-अलग होता है . हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं कि सामने वाला ग़लत ही हो . ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..…