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ज़िंदगी के रंग -75
कहते है – यह ज़िंदगी बुलबुला है. पर जीवन के रंगमंच पर ना तो इसे फूँक मार अस्तित्व मिटाया जा सकता है ना नियति के झोंके से बचाया जा सकता है . हम सब किसी और की ऊँगलियों से बँधे, नियंता के हाथों …