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बराबरी की बात
आईने में अपने प्रतिद्वंद्वी व मित्र को देखा। जीवन की स्पर्धा, प्रतिस्पर्धा , मुक़ाबला किसी और से नहीं अपने आप से हो, तब बात बराबरी की है। वर्ना क्या पता प्रतियोगी या हम, कौन ज्यादा सक्षम है?…