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पीड़ा का आकार
अक्सर सुना था, दर्द भी रचना बन सकती है. जाना एक दिन. जब अंतर्मन से लावा सी बहती-पिघलती पीड़ा को आकार में ढलने दिया. सामने खड़ी मिली एक भावपूर्ण कविता.…