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नीलकंठ
जंग लगी कुंजियों से रिश्तों के सुप्त तालों को खोलने की कोशिश में ना जाने कितने नील गरल निकलते हैं इस सागर से. इन नील पड़े चोट के निशान दिखती नही है दुनिया को, शिव के नीलकंठ की तरह. पर पीड़ा….…